Monday, March 24, 2014

Pitashree



"पापा"…एक ऐसा शब्द, जो बोलते समय मन में नाना प्रकार के भाव लाता है--जब हम चलना सीखते हैं, तो एक आशा कि हमारी छोटी-छोटी उँगलियों को "पापा" पकड़ेंगे और हम चल पाएँगे, वहाँ पहुँच पाएँगे जहाँ हम जाना चाहते हैं । फ़िर जब हम समझदार होते हैं, तो ये शब्द डर के साथ जुड़ जाता है । लड़कपन की उम्र में इस शब्द से जुड़े वाले इन्सान से और भी डर लगता है, छुपन-छुपाई चलती है, आँखें चुराई जाती हैं । 

पर जब वो लड़कपन पार होता है, तो ऐसा वक़्त आता है जब यही "पापा", हमारी ताकत बन जाते हैं, एक दोस्त से भी अच्छे दोस्त साबित होते हैं, एक 'हीरो', एक 'idol', एक SUPERMAN नज़र आते हैं । पापा, पापा, पापा, किसी भी मुसीबत में, किसी भी वक़्त, किसी परेशानी में, यही साथ निभाते हैं और दिल को, दिमाग को सुकून पहुँचाते हैं । एक ऐसा सुकून जिसका सिर्फ़ एहसास खुद को चैन की नींद सुलाता है । 

सदियों से वक़्त अपने समय से चलता जा रहा है, वही SUPERMAN जो हमें साढ़े पाँच बजे उठाकर हमारा भविष्य बनाने का हर प्रयत्न कर रहे थे, अब वो बूढ़े हो चले हैं । पापा को अपने भविष्य की कभी भी चिन्ता नहीं थी, बस हमारी फ़िक्र में सारी उम्र गुज़ार दी, खुद रात को बिना सोये, हमें सुलाया, हमारे बिस्तर गीला करने पर, हमें अपनी सूखी जगह लिटाया और खुद गीली जगह सो गए, हमारी सारी खिलौने की माँगो को पूरा किया, खुद के लिए वो 500 रुपये की Titan की घड़ी नहीं खरीद पाये कि कहीं मेरे बच्चे की नयी स्कूल ड्रेस में पैसे कम न पड़ जाएँ, खुद के लिए नयी बड़ी कार नहीं खरीदी क्यूँकि हमारी स्कूल की फ़ीस, क़िताबें, ट्युशन फ़ीस, घर का खर्च पूरा भी तो करना था । और न जाने वो क्या-क्या पलों का ज़िक्र करते-करते वक़्त कम पड़ जायेगा । 

आज उन पलों को याद करके लगता है कि वही इन्सान जिससे हमने कितनी लड़ाइयाँ करीं, मांगें पूरी न होने पर ग़ुस्सा दिखाया, नख़रे करे, फिर भी पापा ने बड़े आराम से हमें समझाया, normal state में वापस बुलाया, हमारी नींवं मज़बूत बनायी, दुनिया से अकेले लड़ने की ताक़त दिलायी । एक साहस दिया, जीने का मक़सद दिया । 

अब वक़्त, जो सदियों से चलता जा रहा था और चलता रहेगा, वोही वक़्त हमें उनकी जगह पर ला खड़ा कर चला है !! देखना ये है कि क्या हम भी उसी प्रकार पापा जैसी ज़िम्मेदारियाँ निभाएँगे, उन ज़िम्मेदारीयों के साथ अपने पापा का भी ध्यान रख पाएँगे? या हम भी पँछी की तरह हमेशा उड़ कर कभी ना वापस आएँगे? 


हर पल के साथ वो बूढ़े हो रहे हैं, तबियत भी अपनी कहानी सुनाने के लिए तैयार है, अकेलापन चिड़चिड़ापन दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है, वो पैर जो मीलों चलें हैं अब सहारे का इंतज़ार कर रहे हैं । पर आख़िर पापा तो पापा हैं, "Superman" । इतनी जल्दी हार थोड़े ही मानेंगे । आख़िर उनको भी पता है वो हमारे idol हैं, न चाहते हुए भी idol बनने कि कोशिश करेंगे । सिर्फ़ एक वजेह…हम, हमारा विश्वास न टूट जाए उनके strong  होने का । 

शायद वही वक़्त आ गया है जो हमें समझाना चाहता है कि उनकी खुशियाँ गाड़ी, बंगला,नौकर, शोहरत से नहीं, हमसे है, हमारे साथ से है, वोही साथ जो उन्होंने हमें बचपन में दिया था और हम में चलने कि शक्ति आयी थी, वो विश्वास जो वो हमपर करते हैं कि उनके खराब वक़्त में हम होंगे ही, चाहे जो भी हो जाए, जब वो चल नहीं पाएँ, तो हमारे हाथ उन्हें सहारा दे कर ले जाएँ, जब उनको डॉक्टर की ज़रुरत हो, तो हम अपनी so called 'important' meetings छोड़कर उनको अच्छे से अच्छे डॉक्टर को खुद दिखाने ले जाएं, एक दिन ऑफिस से छुट्टी लेकर उनको क्लासिकल म्यूजिक या कल्चरल प्रोग्राम ले जाएँ, उनके साथ ठेले पर खड़े होकर चाट खाएँ, उनको नई बेल्ट दिलवाएँ, उनके साथ उनका मन-पसँद सीरियल देखें और comment भी करें characters पर और आगे कि स्टोरी के डिस्कशन पर बहस भी करें और फ़िर खिलखिला कर हसें । दिन भर कि थकावट उनके  रात में सोते वक़्त पैर दबाएँ, गले पर चादर उढ़ायें और "पापा" के गालों पर किस्स कर कर धीऱे से कहें-"पापा, you are still my hero and nobody else can be like you. You 're the best !!" । सो ज़रूर रहे होंगे वो, पर फिर भी उस चेहरे पर भीनी भीनी सी मुस्कान ज़रूर आजायेगी !! ऐसे होते हैं "पापा" !!

अगर बस एक बार भगवान् मिल जाएँ, उनसे कहूँगा कि उनसे पहले मैं अपने पापा को पूजता हूँ और वो मेरे पापा का साथ मेरी ज़िन्दगी भर रखें । मेरी हर ख़ुशी उनके बिना बिलकुल फ़ीकी है । 

I LOVE YOU PAPA "UNCONDITIONALLY" AND I DO REMEMBER EACH DAY YOUR SACRIFICES, TEACHINGS & VALUES !! JUST TRYING TO PROVE A SON YOU CAN BE PROUD OF !!


2 comments:

  1. Really very emotional and true

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  2. Really awesome and heart touching - PAPA I LOVE YOU

    JAGDISH NEGI

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